भावुक वीडियो देखकर पैसे न भेजें! क्या है 'लाइव स्ट्रीम डोनेशन स्कैम' और ऑनलाइन मदद करने से पहले क्या जांचें?
प्रस्तावना: सोशल मीडिया पर फर्जी लाइव डोनेशन स्कैम से सावधान
सोशल मीडिया पर आजकल Fake Live Donation Scam तेजी से फैल रहा है। इसमें बीमार बच्चों, बुजुर्गों या जरूरतमंद लोगों की भावुक तस्वीरें और वीडियो दिखाकर लोगों से UPI, QR Code या अन्य डिजिटल माध्यमों से पैसे मांगे जाते हैं।
कई मामलों में ये वीडियो पहले से रिकॉर्ड किए गए, चोरी किए गए या नकली होते हैं, जिनका उद्देश्य लोगों की दया और इंसानियत का फायदा उठाकर पैसे ठगना होता है।
यह स्कैम केवल आर्थिक नुकसान ही नहीं पहुंचाता, बल्कि असली जरूरतमंद लोगों के प्रति समाज का भरोसा भी कम करता है। इसलिए भावनाओं में बहकर तुरंत पैसे भेजने के बजाय हर अपील की सत्यता जांचना बेहद जरूरी है।
इस लेख में आप जानेंगे कि Live Stream Donation Scam क्या है, यह कैसे काम करता है, इसकी पहचान कैसे करें और सुरक्षित तरीके से दान करने के सही तरीके क्या हैं, ताकि आपकी मदद सही व्यक्ति तक पहुंचे और आप साइबर ठगी से सुरक्षित रह सकें।
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'लाइव स्ट्रीम डोनेशन स्कैम' क्या है और यह कैसे शुरू हुआ?
इसे आसान शब्दों में समझने के लिए हमें सोशल मीडिया के 'लाइव स्ट्रीम' (Live Stream) फीचर को समझना होगा।
फेसबुक, यूट्यूब और इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म्स अपने यूजर्स को यह सुविधा देते हैं कि वे वास्तविक समय (Real-Time) में कैमरा चालू करके लाइव आ सकें और दुनिया भर के दर्शकों से सीधे बातचीत कर सकें।
जब कोई सामान्य व्यक्ति किसी लाइव वीडियो को देखता है, तो उसके मन में स्वाभाविक भरोसा होता है कि स्क्रीन पर जो कुछ भी दिख रहा है, वह इसी वक्त, इसी क्षण सचमुच घटित हो रहा है।
स्कैमर्स ने इसी 'भरोसे' को अपनी ढाल बनाया है। जब आप अपने सोशल मीडिया अकाउंट को स्क्रॉल कर रहे होते हैं,
तो अचानक आपके फीड में एक ऐसा वीडियो आता है जिसमें एक छोटा बच्चा अस्पताल के आईसीयू (ICU) बेड पर वेंटिलेटर के सहारे सांसे ले रहा होता है, उसके शरीर में कई नलियां लगी होती हैं, या फिर कोई लाचार मां-बाप रोते हुए हाथ जोड़कर अपने बच्चे के इलाज के लिए भीख मांग रहे होते हैं।
वीडियो के ऊपर या नीचे बेहद भावुक और डराने वाले संदेश लिखे होते हैं, जैसे•"अगर अगले 2 घंटे में इस बच्चे के ऑपरेशन के लिए 50,000 रुपये नहीं मिले, तो इसकी जान चली जाएगी"•"डॉक्टरों ने हाथ खड़े कर दिए हैं, अब सिर्फ आपका दान ही इसे बचा सकता है"या•"इस लाचार बुजुर्ग की मदद करें, भगवान आपको इसका सौ गुना फल देगा।"स्क्रीन पर तुरंत पैसे ट्रांसफर करने के लिए डिजिटल पेमेंट मोड्स जैसे Google Pay, PhonePe, Paytm, UPI ID, QR Code या फिर यूट्यूब के Super Chat और Super Stickers के विकल्प प्रमुखता से चमकाए जाते हैं।दर्शक इसे पूरी तरह सच और अत्यंत आपातकालीन स्थिति मानकर तुरंत अपनी क्षमता के अनुसार 50 रुपये से लेकर हजारों रुपये तक ट्रांसफर कर देते हैं।
लेकिन हकीकत यह होती है कि उस स्क्रीन के पीछे कोई अस्पताल या पीड़ित परिवार नहीं होता, बल्कि एक वातानुकूलित कमरे में बैठा साइबर अपराधी होता है जो आपकी दयालुता को सीधे अपने बैंक खाते में कैश कर रहा होता है।
स्कैमर्स का मॉडस ऑपेरेंडी: यह पूरा खेल कैसे खेला जाता है?
यह कोई छोटी-मोटी चोरी नहीं है, बल्कि एक सुनियोजित संगठित अपराध (Organized Crime) का रूप ले चुका है। इसके पीछे स्कैमर्स की एक पूरी तकनीकी और मनोवैज्ञानिक रणनीति काम करती है, जिसके मुख्य चरण निम्नलिखित हैं:
1. डिजिटल सामग्री की चोरी (Content Theft)
स्कैमर्स खुद कोई नया वीडियो नहीं बनाते। वे इंटरनेट के विशाल समंदर से पुरानी न्यूज़ रिपोर्ट्स, सालों पुराने क्राउडफंडिंग अभियानों (जैसे गोफंडमी, मिलाप या केटो के पुराने केस), या फिर चीन, वियतनाम, अफ्रीका जैसे दूरदराज के देशों की वेबसाइटों से सचमुच बीमार, दुर्घटनाग्रस्त या दिव्यांग बच्चों और बुजुर्गों के संवेदनशील वीडियो डाउनलोड कर लेते हैं।कई बार ये वीडियो उन बच्चों के होते हैं जो या तो सालों पहले ठीक हो चुके होते हैं या दुर्भाग्यवश अब इस दुनिया में नहीं हैं।2. 'सॉफ्टवेयर लूप' के जरिए नकली लाइव का निर्माण
वीडियो चुराने के बाद स्कैमर्स विशेष ब्रॉडकास्टिंग सॉफ्टवेयर (जैसे OBS Studio, Streamlabs या Prism Live Studio) का इस्तेमाल करते हैं।इस सॉफ्टवेयर की मदद से उस चुराए गए 2 या 3 मिनट के छोटे से वीडियो क्लिप को एक निरंतर लूप (Continuous Loop) में सेट कर दिया जाता है।यानी वही 2 मिनट का रोने या तड़पने का दृश्य बिना रुके 24-24 घंटे तक लाइव के रूप में चलता रहता है। सोशल मीडिया के एल्गोरिदम को धोखा देने के लिए वे वीडियो के कोने में एक digital घड़ी या टाइमर लगा देते हैं ताकि देखने वाले को लगे कि समय वास्तविक चल रहा है।3. बॉट्स (Bots) और फेक कमेंट्स का चक्रव्यूह
जब यह फेक लाइव स्ट्रीम शुरू होती है, तो शुरुआत में आम लोगों का भरोसा जीतने के लिए स्कैमर्स 'बॉट्स' (कंप्यूटर द्वारा संचालित नकली प्रोफाइल) का उपयोग करते हैं।ये बॉट्स कमेंट सेक्शन में लगातार संदेश लिखते हैं, जैसे—•"मैंने अभी-अभी इस बच्चे के लिए 2000 रुपये भेजे, भगवान इसे लंबी उम्र दे"•"यह पूरी तरह असली है, मैंने अस्पताल में बात की है।"इसके अलावा, ये बॉट्स फर्जी स्क्रीनशॉट भी पोस्ट करते हैं जिनमें सफल ट्रांजैक्शन दिखाया जाता है। इसे देखकर लाइव देख रहा एक आम यूजर मानसिक दबाव में आ जाता है और सोचता है कि जब सब मदद कर रहे हैं, तो मुझे भी पीछे नहीं रहना चाहिए।4. एल्गोरिदम का फायदा उठाना
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स का यह नियम है कि जिस वीडियो पर जितने ज्यादा लोग रुकते हैं, कमेंट करते हैं या शेयर करते हैं, एल्गोरिदम उसे उतने ही ज्यादा नए लोगों को दिखाता है।चूंकि ये वीडियो अत्यंत भावुक होते हैं, लोग इन पर रुकते हैं, प्रार्थना वाले इमोजी कमेंट करते हैं और शेयर करते हैं। नतीजा यह होता है कि कुछ ही घंटों में वह फर्जी लाइव स्ट्रीम लाखों लोगों के मोबाइल तक पहुंच जाती है।
यह स्कैम आपकी जेब और समाज के लिए कितना खतरनाक है?
कुछ लोग सोच सकते हैं कि
• अगर मैंने किसी की मदद के लिए 100 रुपये दे भी दिए और वह झूठ निकला, तो मेरा क्या नुकसान हुआ? मेरा इरादा तो नेक था।
• लेकिन यह सोच अत्यंत खतरनाक है। यह स्कैम केवल आपकी जेब से पैसे नहीं निकालता, बल्कि इसके बहुत गहरे सामाजिक और कानूनी दुष्परिणाम होते हैं:
• अपराध जगत को फंडिंग: आपके द्वारा दान किया गया पैसा किसी मासूम की जान बचाने के बजाय सीधे ड्रग्स, हथियारों की तस्करी, जुआ या अन्य साइबर अपराधों (जैसे फिशिंग और हैकिंग) को बढ़ावा देने में इस्तेमाल होता है।
• असली जरूरतमंदों का नुकसान: जब लोग इस तरह के घोटालों के शिकार होते हैं और बाद में उन्हें सच का पता चलता है, तो उनका ऑनलाइन दान प्रणाली से भरोसा पूरी तरह उठ जाता है।
इसका सबसे बड़ा खामियाजा उन असली मरीजों और गरीब परिवारों को भुगतना पड़ता है जो सचमुच जीवन और मृत्यु की लड़ाई लड़ रहे होते हैं और सोशल मीडिया के जरिए मदद की गुहार लगाते हैं।
• भावनात्मक शोषण और मानसिक आघात: जब किसी संवेदनशील व्यक्ति को पता चलता है कि किसी बच्चे की मौत के झूठे नाटक का इस्तेमाल करके उसे ठगा गया है, तो उसे गहरा मानसिक आघात पहुंचता है। यह समाज में अविश्वास और संवेदनहीनता को जन्म देता है।
💡 वास्तविक घटना का उदाहरण: जब मैसेंजर पर आया 'नाइजीरियाई ठग'
हाल ही में एक लाइव स्ट्रीम के दौरान ऐसा ही एक मामला सामने आया, जहाँ नाइजीरिया से एक व्यक्ति ने मैसेंजर (Messenger) पर सीधे मुझ से संपर्क किया।
उसने चैट में लिखा, "मैं बहुत गरीब हूँ, मैंने कई दिनों से खाना नहीं खाया है, कृपया कुछ पैसे देकर मेरी मदद करें।" अपनी बात को सच साबित करने के लिए उसने कई तरह की तस्वीरें और रोने-धोने वाले वीडियो भी भेजे, जिसमें वह बेहद लाचार और बीमार दिख रहा था।
लेकिन जब उससे तुरंत का कोई नया फोटो या लाइव वीडियो प्रमाण मांगा गया, तो वह सकपका गया। यह ठीक उसी इंटरनेशनल इमोशनल ब्लैकमेलिंग का हिस्सा था, जिसके जरिए ये ठग भारत जैसे संवेदनशील देशों के लोगों को निशाना बनाते हैं।
🤝 इंसानियत बनाम सावधानी: दिल के साथ दिमाग भी ज़रूरी
यहाँ पर यह समझना बेहद ज़रूरी है कि इस पूरे लेख का उद्देश्य यह बिल्कुल नहीं है कि हमें किसी ज़रूरतमंद की मदद करना ही बंद कर देना चाहिए।
• दया इंसान का सबसे बड़ा गुण है: दूसरों के दुख को देखकर हमारा दिल पिघलना और मदद के लिए हाथ आगे बढ़ाना ही हमें 'इंसान' बनाता है। अगर हम डरकर मदद करना छोड़ देंगे, तो समाज से इंसानियत खत्म हो जाएगी।• लेकिन सावधानी भी है अनिवार्य: हमारी इसी दयालुता और इंसानियत का फायदा उठाकर स्कैमर्स ऐश कर रहे हैं।
इसलिए, किसी की मदद ज़रूर करें, लेकिन स्कैमर्स के जाल में फँसे बिना। दान करते समय दिल का इस्तेमाल करने के साथ-साथ थोड़ी सी व्यावहारिक सावधानी और दिमागी जांच-पड़ताल भी उतनी ही ज़रूरी है ताकि आपका पैसा किसी ठग की जेब में जाने के बजाय सचमुच किसी भूखे का पेट भर सके या किसी की जान बचा सके।
असली और नकली लाइव डोनेशन की पहचान कैसे करें? (पुख्ता तरीके)
अगर आप भविष्य में इंटरनेट पर किसी लाचार व्यक्ति की मदद करना चाहते हैं, तो आंख मूंदकर पैसे भेजने के बजाय एक सजग नागरिक की तरह इन वैज्ञानिक और व्यावहारिक तरीकों से उसकी सत्यता की जांच अवश्य करें:
1. लाइव चैट में 'रियलिटी चेक' (Reality Check) करें
यह सबसे आसान और अचूक तरीका है। यदि कोई वीडियो सचमुच लाइव चल रहा है और सामने कोई वास्तविक पीड़ित परिवार है, तो वह कमेंट बॉक्स में आने वाले सवालों को पढ़ सकता है और उनका जवाब दे सकता है।आप चैट बॉक्स में जाकर कुछ विशिष्ट सवाल पूछें, जैसे• आप अभी किस शहर के कौन से अस्पताल में हैं?• अस्पताल का बेड नंबर क्या है?या• कृपया अपना दाहिना हाथ हिलाकर दिखाएं।• अगर वह वीडियो फर्जी या प्री-रिकॉर्डेड लूप है, तो स्क्रीन पर दिख रहा व्यक्ति आपके सवाल का कोई जवाब नहीं देगा और वीडियो अपनी पुरानी स्थिति में ही चलता रहेगा।यदि कमेंट्स को 'डिसेबल' (बंद) किया गया है, तो समझ जाएं कि दाल में कुछ काला है।2. यूपीआई (UPI) और बैंक खाते के प्रकार को समझें
दान प्राप्त करने के वैध नियमों के तहत, यदि कोई पंजीकृत गैर-सरकारी संगठन (Registered NGO) या चैरिटी संस्था किसी मरीज के लिए फंड जुटा रही है
तो उनका बैंक खाता हमेशा एक 'कॉरपोरेट या करंट अकाउंट' होता है जो उस संस्था के नाम पर पंजीकृत होता है (जैसे - HELPING HANDS FOUNDATION)।इसके विपरीत, स्कैमर्स हमेशा व्यक्तिगत यूपीआई आईडी (जैसे - rakesh8492@okaxis, xyz99@ybl) या किसी रैंडम व्यक्ति के क्यूआर कोड का इस्तेमाल करते हैं। अगर नाम और संस्था में कोई मेल न हो, तो कभी पैसे न भेजें।3. सोशल मीडिया पेज की 'पारदर्शिता और इतिहास' (Page History) खंगालें
जिस फेसबुक पेज, इंस्टाग्राम हैंडल या यूट्यूब चैनल पर वह लाइव चल रहा है, उसके मुख्य प्रोफाइल पर जाएं। उसकी 'Page Transparency' या 'About' सेक्शन को चेक करें। जांचें कि:• यह पेज कब बनाया गया था? (स्कैमर्स अक्सर 15-20 दिन पुराने या नए खरीदे गए पेजों का इस्तेमाल करते हैं)।• क्या इस पेज ने अतीत में कोई सामाजिक कार्य या पोस्ट शेयर की है?• क्या इस पेज का नाम हाल ही में बदला गया है? (कई बार स्कैमर्स किसी गेमिंग या मीम पेज को खरीदकर उसका नाम बदलकर 'ह्यूमन राइट्स' या 'चैरिटी' रख देते हैं)।यदि पेज पर केवल डोनेशन लाइव के अलावा कोई दूसरा कंटेंट नहीं है, तो वह पूरी तरह फर्जी है।4. गूगल लेंस और रिवर्स इमेज सर्च का उपयोग
अगर आपको किसी बच्चे की तस्वीर या वीडियो पर शक है, तो उसका एक स्क्रीनशॉट लें। अपने मोबाइल में 'Google Lens' या किसी भी 'Reverse Image Search' टूल पर जाएं और उस तस्वीर को अपलोड करें।अगर वह तस्वीर किसी पुरानी न्यूज़ वेबसाइट, किसी विदेशी ब्लॉग या किसी पुराने क्राउडफंडिंग केस से चुराई गई होगी, तो गूगल तुरंत आपको उसके असली स्रोत (Original Source) तक पहुंचा देगा। इससे स्कैमर्स का झूठ एक मिनट में बेनकाब हो जाएगा।
सुरक्षित और सही तरीके से दान करने की गाइडलाइंस
मदद की भावना को कभी मरना नहीं चाहिए, बल्कि इसे सही दिशा में मोड़ा जाना चाहिए। अगर आप वाकई समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाना चाहते हैं और किसी की जान बचाना चाहते हैं, तो इन सुरक्षित और कानूनी तरीकों को अपनाएं:
• प्रमाणित क्राउडफंडिंग प्लेटफॉर्म्स (Verified Platforms): भारत में Milaap (मिलाप), Ketto (केटो), GiveIndia (गिव इंडिया) और
ImpactGuru (इम्पैक्ट गुरु) जैसे बड़े और प्रतिष्ठित प्लेटफॉर्म्स मौजूद हैं। इन प्लेटफॉर्म्स की एक सख्त कानूनी प्रक्रिया होती है।
जब भी कोई मरीज इन पर अपना केस रजिस्टर करता है, तो इनकी टीम अस्पताल जाकर मरीज के मेडिकल पेपर्स, डॉक्टर के पर्चे, अनुमानित खर्च (Estimates) और आधार कार्ड की भौतिक रूप से जांच करती है।
इन प्लेटफॉर्म्स के जरिए किया गया दान 100% सुरक्षित होता है और इसमें टैक्स छूट (80G) का लाभ भी मिलता है।
• सीधे अस्पताल के खाते में भुगतान करें: यदि आपको सोशल मीडिया पर कोई केस सच लगता है, तो पीड़ित परिवार से अस्पताल का नाम और मरीज का यूनीक रजिस्ट्रेशन नंबर (UHID) मांगें।
अस्पताल के आधिकारिक नंबर पर कॉल करके उस मरीज के बारे में पुष्टि करें।
आप चाहें तो सीधे उस अस्पताल के मैनेजमेंट अकाउंट में मरीज के इलाज के नाम पर पैसा ट्रांसफर कर सकते हैं, जिससे यह सुनिश्चित होगा कि पैसा सिर्फ इलाज में ही खर्च होगा।
• स्थानीय स्तर पर मदद करें: अपने आस-पास के सरकारी अस्पतालों, अनाथालयों, वृद्धाश्रमों या पंजीकृत स्थानीय एनजीओ में जाकर सीधे मदद करें।
अपनी आंखों के सामने की गई मदद में किसी भी प्रकार के धोखे की गुंजाइश नहीं होती।
कानूनी कार्रवाई: स्कैम दिखने पर क्या करें?
एक जागरूक नेटिज़न (Netizen) होने के नाते, यदि आपके सामने ऐसा कोई भी फर्जी लाइव डोनेशन वीडियो आता है, तो केवल उसे छोड़कर आगे न बढ़ें, बल्कि ये कदम उठाएं:
1. रिपोर्ट बटन का प्रयोग करें: उस वीडियो के कोने में दिए गए थ्री-डॉट्स (Three Dots) पर क्लिक करें और 'Report Content' में जाकर "Fraud or Scam" "Misleading" या "Child Abuse/Exploitation" के तहत रिपोर्ट दर्ज करें।
जब एक साथ कई लोग रिपोर्ट करते हैं, तो सोशल मीडिया का सिस्टम उस लाइव स्ट्रीम को तुरंत ब्लॉक कर देता है।
2. कमेंट में लोगों को सचेत करें: यदि संभव हो, तो कमेंट बॉक्स में लिखें कि
•"यह एक फेक लूप वीडियो है, कृपया कोई भी पैसे न भेजें"
• ताकि दूसरे भोले-भाले लोग ठगी का शिकार होने से बच सकें।
3. साइबर सेल में शिकायत: यदि आपके साथ इस तरह का कोई बड़ा फ्रॉड हुआ है, तो तुरंत भारत सरकार के आधिकारिक साइबर क्राइम पोर्टल www.cybercrime.gov.in पर जाएं या राष्ट्रीय हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करके अपनी शिकायत दर्ज कराएं।
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निष्कर्ष: डिजिटल साक्षरता ही सबसे बड़ा कवच है
तकनीक कभी खराब नहीं होती, खराब होती है उसे इस्तेमाल करने वाले अपराधी की नीयत। 'लाइव स्ट्रीम डोनेशन स्कैम' इस बात का ज्वलंत उदाहरण है कि कैसे हमारी सबसे अच्छी मानवीय भावना—'दया'—को हमारे खिलाफ एक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।
डिजिटल युग में केवल साक्षर होना काफी नहीं है, बल्कि 'डिजिटल रूप से जागरूक और सतर्क' होना अनिवार्य है।
आपकी थोड़ी सी समझदारी, थोड़ा सा समय और थोड़ी सी जांच न केवल आपके मेहनत की कमाई को गलत हाथों में जाने से बचा सकती है,
बल्कि समाज में वास्तविक दान की पवित्रता और विश्वास को भी अक्षुण्ण रख सकती है। अगली बार जब भी कोई सोशल मीडिया पर आपकी भावनाओं को झकझोरने की कोशिश करे, तो दिल से सोचने के साथ-साथ दिमाग का इस्तेमाल भी ज़रूर करें।
सतर्क रहें, सुरक्षित रहें और दूसरों को भी जागरूक बनाएं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
1. क्या सोशल मीडिया पर दिखने वाले सभी डोनेशन वीडियो फर्जी होते हैं?
नहीं, सभी वीडियो फर्जी नहीं होते। कई बार असली एनजीओ (NGOs) और पीड़ित परिवार भी मदद के लिए सोशल मीडिया का सहारा लेते हैं।
लेकिन आज के समय में स्कैमर्स की संख्या बहुत बढ़ गई है, इसलिए बिना पूरी जांच-पड़ताल (जैसे अस्पताल का बिल या संस्था का रजिस्ट्रेशन) किए किसी को भी पैसे न भेजें।
2. अगर मैंने गलती से किसी फर्जी लाइव स्ट्रीम में पैसे भेज दिए हैं, तो क्या करूँ?
अगर आपके साथ धोखाधड़ी हुई है, तो तुरंत अपने बैंक को सूचित करें और ट्रांजैक्शन को ब्लॉक करने का अनुरोध करें।
इसके बाद, भारत सरकार के आधिकारिक साइबर क्राइम पोर्टल (www.cybercrime.gov.in) पर जाएं या हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करके अपनी शिकायत दर्ज कराएं।
3. असली मरीज के लिए सुरक्षित तरीके से ऑनलाइन दान कैसे करें?
सुरक्षित दान करने का सबसे अच्छा तरीका प्रमाणित क्राउडफंडिंग प्लेटफॉर्म्स (जैसे Milaap या Ketto) का उपयोग करना है।
ये प्लेटफॉर्म्स मरीज के मेडिकल दस्तावेजों की पूरी जांच करने के बाद ही फंड जुटाते हैं, जिससे आपका पैसा सही जगह पहुंचता है।
💬 अब आपकी बारी: क्या आपने भी ऐसा कोई वीडियो देखा है?
क्या आपके सोशल मीडिया फीड पर भी कभी ऐसा कोई संदेहास्पद 'लाइव डोनेशन' वीडियो आया है? आपने उस समय क्या किया? हमें नीचे कमेंट बॉक्स (Comment Box) में लिखकर ज़रूर बताएं।
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