नारी सम्मान क्यों जरूरी है? नारी सशक्तिकरण, शिक्षा और समाज की प्रगति पर एक प्रेरक विचार (2026 Guide)
प्रस्तावना नारी — यह केवल एक शब्द नहीं, बल्कि जीवन, संवेदना, सृजन और सभ्यता की निरंतरता का प्रतीक है। यदि हम मानव समाज की जड़ों को टटोलें, तो पाएँगे कि हर रिश्ते, हर संस्कार और हर मूल्य के केंद्र में नारी ही मौजूद है। जब कोई शिशु इस संसार में आता है, तो उसकी पहली पहचान उसकी माँ होती है। वह बोलना, चलना, समझना और प्रेम करना सबसे पहले अपनी माँ से ही सीखता है। यही कारण है कि नारी को केवल परिवार का हिस्सा नहीं, बल्कि समाज के चरित्र निर्माण की सबसे महत्वपूर्ण शक्ति मानी जाता है। आज के दौर में इतना विकसित होने के बाद भी अगर कही नारी के साथ अभद्रता या उत्पीड़न होता है। बेहद निंदनीय और शर्मनाक है। विभिन्न रूपों में नारी की भूमिका: समाज का आधार स्तंभ नारी अपने जीवनकाल में कई महत्वपूर्ण भूमिकाएँ निभाती है, और उसका हर रूप समाज को एक नई दिशा और संबल देता है: • माँ के रूप में (प्रथम गुरु): माँ केवल जन्म नहीं देती, बल्कि वह बच्चे की पहली शिक्षक होती है। वह बच्चे में नैतिकता, दया और साहस के बीज बोती है। एक माँ द्वारा दिए गए संस्कार ही भविष्य के नागरिक का निर्...