भूमिका समाज में लंबे समय तक महिलाओं पर होने वाले अत्याचारों पर चर्चा होती रही है, जो आवश्यक भी है। लेकिन आज एक दूसरा पक्ष भी सामने आ रहा है, जिस पर खुलकर बात कम होती है—कुछ पुरुष भी मानसिक, भावनात्मक, सामाजिक और पारिवारिक प्रताड़ना का सामना कर रहे हैं। इस विषय का उद्देश्य किसी एक पक्ष को सही या गलत साबित करना नहीं है। उद्देश्य केवल यह समझना है कि सम्मान, विश्वास और संवाद के बिना कोई भी परिवार सुखी नहीं रह सकता। यदि किसी पुरुष के साथ अन्याय होता है, तो उसकी बात भी उतनी ही गंभीरता से सुनी जानी चाहिए जितनी किसी महिला की। न्याय का आधार लिंग नहीं बल्कि सत्य होना चाहिए। बदलता समाज और पुरुष प्रताड़ना की अनदेखी समाज तेजी से बदल रहा है। महिलाओं के अधिकार और सशक्तिकरण ने उन्हें नई पहचान दी है, जो सकारात्मक बदलाव है। लेकिन कुछ परिस्थितियों में इस बदलाव का गलत उपयोग भी देखने को मिलता है, जहां बिना पूरी सच्चाई जाने पुरुष को दोषी मान लिया जाता है। कई पुरुष अपनी परेशानी किसी से साझा नहीं करते क्योंकि उन्हें लगता है कि लोग उनका मजाक उड़ाएंगे या उनकी बात पर विश्वास न...
प्रगती ब्लॉग सामाजिक जागरूकता, मानसिक स्वास्थ्य और पर्यावरण से जुड़े विषयों पर सरल हिंदी में उपयोगी जानकारी प्रदान करता है। हमारा उद्देश्य जागरूक, संवेदनशील और सकारात्मक समाज के निर्माण में योगदान देना है।