वसुधैव कुटुम्बकम का अर्थ क्या है? सम्पूर्ण पृथ्वी एक परिवार का संदेश
“वसुधैव कुटुम्बकम्” अर्थात — सम्पूर्ण पृथ्वी एक परिवार है। आज की दुनिया में यह विचार केवल आदर्श नहीं, बल्कि मानवता की आवश्यकता बन चुका है। भूमिका: आज की दुनिया और हमारी सोच हम सब अपने जीवन में अक्सर अपने परिवार, अपने समाज और अपने देश के बारे में सोचते हैं। हम चाहते हैं हमारा परिवार, समाजऔर देश सुरक्षित और खुशहाल रहे। यह स्वाभाविक भी है, क्योंकि मनुष्य का जीवन परिवार से ही प्रारंभ होता है। लेकिन अगर हम आज की दुनिया पर ध्यान दें, तो हमें समझ आता है कि दुनिया पहले जैसी नहीं रही। आज दुनिया पहले से कहीं अधिक एक-दूसरे से जुड़ी हुई है। आज अगर दुनिया के किसी एक हिस्से में कोई बड़ी घटना होती है, तो उसका असर धीरे-धीरे पूरी दुनिया तक पहुँच जाता है। कहीं युद्ध होता है तो उसका प्रभाव व्यापार और उद्योग पर पड़ता है। कहीं महामारी फैलती है तो उसका असर पूरी मानवता पर दिखाई देता है। कहीं प्राकृतिक आपदा आती है तो उसका प्रभाव केवल उसी क्षेत्र तक सीमित नहीं रहता। इसलिए आज यह समझना बहुत आवश्यक हो गया है कि संपूर्ण पृथ्वी वास्तव में एक परिवार की तरह है। जैसे परिवार के एक सदस्य की समस्या से पूरा ...